बेरोजगारी :Unemployment in India
भारत मे बेरोजगारी (Unemployment in India)
बेरोजगारी: (Unemployment in India) भारत मे बेरोजगारी एक विकराल समस्या है । हम अध्ययन करेगे – बेरोजगारी क्या है इसके प्रकार, कारण , मापन , दूर करने के उपाय एवं अन्य महत्वपूर्ण तथ्य ।
रोज़गार (Employment) क्या है?
रोज़गार केवल काम करना नहीं है, बल्कि ऐसी आर्थिक गतिविधियों में शामिल होना है जो GDP में योगदान करे। जब कोई व्यक्ति गुणवत्तापूर्ण और उत्पादक कार्य करता है, तभी उसे वास्तविक अर्थों में रोज़गार कहा जा सकता है। Unemployment in India को समझने के लिए हमें सबसे पहले रोज़गार की सही परिभाषा जाननी चाहिए।
रोज़गार का वर्गीकरण
- जो लोग काम करने में सक्षम और इच्छुक हैं, उन्हें उचित काम मिलना चाहिए।
- भारत जैसे विकासशील देशों में यह हासिल करना चुनौतीपूर्ण है।
- मजदूरी का निर्धारण व्यक्ति के कौशल के अनुसार होना चाहिए। जब किसी को उसके कौशल के हिसाब से वेतन मिलता है, तब उसकी उत्पादकता बढ़ जाती है।
Unemployment in India का एक बड़ा कारण यह भी है कि श्रमिकों को उनके कौशल के अनुरूप रोजगार नहीं मिलता।
भारत में संगठित बनाम असंगठित क्षेत्र
संगठित क्षेत्र (Organised Sector)
- जहां बिजली के साथ कम से कम 10 लोग या बिना बिजली के 20 से अधिक लोग काम करते हैं।
- यहां नौकरियां अपेक्षाकृत सुरक्षित और सुविधाजनक मानी जाती हैं।
असंगठित क्षेत्र (Unorganised Sector)
- भारत में नौकरी निर्माण का सबसे बड़ा हिस्सा यहीं से आता है।
- कृषि, स्वरोज़गार और MSMEs इसके उदाहरण हैं।
- लगभग 85% नौकरियां असंगठित क्षेत्र से आती हैं, जिनकी गुणवत्ता कम होती है।
- यहां तक कि संगठित क्षेत्रों जैसे निर्माण (Construction) में भी दिहाड़ी मजदूरों की संख्या अधिक है।
Unemployment in India का बड़ा कारण यह है कि असंगठित क्षेत्र में रोजगार की गुणवत्ता बेहद निम्न है।
कार्यबल का असंगठीकरण (Informalisation of Workforce)
भारत में रोजगार का बड़ा हिस्सा अभी भी असंगठित है।
- लगभग 80% श्रमिक असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं।
- करीब 92.4% श्रमिकों के पास न तो लिखित अनुबंध है, न पेड लीव और न ही अन्य सुविधाएं।
यही कारण है कि Unemployment in India केवल रोजगार की कमी नहीं, बल्कि रोजगार की गुणवत्ता से भी जुड़ी हुई समस्या है।
बेरोजगारी (Unemployment in India)
बेरोजगारी वह स्थिति है जब कोई व्यक्ति सक्षम और इच्छुक होते हुए भी नौकरी नहीं पा सकता।
यह किसी भी अर्थव्यवस्था की सेहत का प्रमुख संकेत है।
यदि बेरोजगारी दर अधिक हो, तो यह आर्थिक संकट की तरफ इशारा करती है।
Unemployment in India आज एक गंभीर समस्या है, क्योंकि यह सीधे विकास और गरीबी उन्मूलन से जुड़ा हुआ है।
भारत में बेरोजगारी के प्रकार (Types of Unemployment in India)
- आंशिक बेरोजगारी (Frictional Unemployment)
- तब होती है जब लोग स्वेच्छा से नौकरी बदलते हैं।
- उदाहरण: कर्मचारी नई नौकरी खोजते समय या नए ग्रेजुएट्स नौकरी पाने की कोशिश में।
- यह अस्थायी है और कभी-कभी सकारात्मक मानी जाती है।
हालांकि, अगर यह लंबे समय तक बनी रहे तो Unemployment in India की गुणवत्ता को खराब करती है।
- संरचनात्मक बेरोजगारी (Structural Unemployment)
- अर्थव्यवस्था की संरचना में बदलाव के कारण।
- मुख्य कारण:
- तकनीकी क्रांति (IT क्रांति के बाद बैंकिंग क्षेत्र)
- निजीकरण (1991 के बाद)
- कुछ क्षेत्रों की मांग घट जाना (जैसे कपड़ा उद्योग)
Unemployment in India में संरचनात्मक बदलाव का गहरा असर देखने को मिलता है।
- चक्रीय बेरोजगारी (Cyclical Unemployment)
- आर्थिक मंदी और विकास के दौरान रोजगार में उतार-चढ़ाव।
- मंदी के दौरान बेरोजगारी बढ़ती है और विकास के दौरान घटती है।
यह विकसित और विकासशील दोनों देशों में पाई जाती है। Unemployment in India भी आर्थिक चक्रों से प्रभावित होती है।
- मौसमी बेरोजगारी (Seasonal Unemployment)
- जब रोजगार मौसम पर निर्भर करता है।
- उदाहरण: भारत की कृषि (खरीफ और रबी फसल)।
- सरकार ने इसे नियंत्रित करने के लिए मनरेगा (NREGA) जैसी योजनाएं शुरू की हैं।
Seasonal nature of jobs भी Unemployment in India को बढ़ावा देता है।
- अपरिकलित बेरोजगारी (Disguised Unemployment)
- जब ज़रूरत से अधिक लोग किसी काम में लगे हों।
- ऐसे श्रमिक का योगदान शून्य या बहुत कम होता है।
Disguised unemployment खासकर ग्रामीण भारत में Unemployment in India का बड़ा कारण है।
बेरोजगारी से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण शब्द
- सीमांत उत्पादकता (Marginal Productivity): अतिरिक्त श्रमिक से मिलने वाला अतिरिक्त उत्पादन।
- श्रम शक्ति (Labour Force): काम करने के योग्य और इच्छुक जनसंख्या।
- श्रम शक्ति भागीदारी दर (LFPR): कुल जनसंख्या में से श्रम शक्ति का प्रतिशत।
- वर्कर-पॉपुलेशन रेशियो: कुल जनसंख्या में से कार्यरत लोगों का प्रतिशत।
- बेरोजगारी दर (Unemployment Rate):
बेरोजगारश्रमिक/कुलश्रमशक्ति×100बेरोजगार श्रमिक / कुल श्रम शक्ति × 100बेरोजगारश्रमिक/कुलश्रमशक्ति×100- इसे बेरोजगारी का सबसे अच्छा संकेतक माना जाता है।
Unemployment in India को समझने के लिए इन सभी अवधारणाओं को जानना ज़रूरी है।
भारत में बेरोजगारी मापने के तरीके (NSSO Methods)
- सामान्य स्थिति पद्धति (Usual Status): पिछले 365 दिनों में ज्यादातर समय बेरोजगार रहने वालों की गिनती।
- साप्ताहिक स्थिति पद्धति (Weekly Status): पिछले सप्ताह में एक घंटे भी काम न करने वाले को बेरोजगार माना जाता है।
- दैनिक स्थिति पद्धति (Daily Status): जिस दिन व्यक्ति ने एक घंटे भी काम न किया हो, उस दिन वह बेरोजगार गिना जाएगा।
Unemployment in India की गणना के लिए ये पद्धतियां बेहद महत्वपूर्ण हैं।
आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (Periodic Labour Force Survey – PLFS)
- राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) 2017 से हर साल PLFS करता है।
- पहली रिपोर्ट: 2019
- दूसरी रिपोर्ट: 2020
- तीसरी रिपोर्ट: 2021
PLFS 2020-21 की मुख्य बातें
- बेरोजगारी दर 2019-20 के 4.8% से घटकर 2020-21 में 4.2% हो गई।
- ग्रामीण क्षेत्रों में दर 3.3% और शहरी क्षेत्रों में 6.7% रही।
- श्रम शक्ति भागीदारी दर (LFPR) 40.1% से बढ़कर 41.6% हो गई।
- प्रवासन दर (Migration Rate) 28.9% रही।
- महिलाओं में ग्रामीण क्षेत्रों में 48% और शहरी क्षेत्रों में 47.8%।
- वर्कर पॉपुलेशन रेशियो 38.2% से बढ़कर 39.8% हुआ।
इन आंकड़ों से साफ पता चलता है कि Unemployment in India एक जटिल और बहुआयामी समस्या है।
भारत में बेरोजगारी के कारण | Causes of Unemployment in India
परिचय
भारत में बेरोजगारी (Unemployment in India) आज देश की सबसे बड़ी सामाजिक और आर्थिक समस्याओं में से एक है। लाखों पढ़े-लिखे युवा काम की तलाश में भटकते रहते हैं, लेकिन उन्हें मनचाहा रोजगार नहीं मिल पाता। यह समस्या सिर्फ व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे समाज और अर्थव्यवस्था पर असर डालती है।
- तेजी से बढ़ती जनसंख्या
भारत में बेरोजगारी (Unemployment in India) का प्रमुख कारण बढ़ती हुई जनसंख्या है। हर साल लाखों युवा नौकरी बाजार में आते हैं, लेकिन रोजगार के अवसर उसी अनुपात में नहीं बनते। नतीजतन, योग्य लोग भी बेरोजगार रह जाते हैं।
- शिक्षा और व्यावहारिक कौशल की कमी
आज भी भारत की शिक्षा व्यवस्था रोजगार-उन्मुख नहीं है। भारत में बेरोजगारी (Unemployment in India) बढ़ने की एक बड़ी वजह यह है कि डिग्री मिलने के बाद भी युवाओं में वह कौशल नहीं होता जो उद्योगों और कंपनियों को चाहिए। यही कारण है कि पढ़े-लिखे युवा भी बेरोजगारी झेलते हैं।
- कृषि पर निर्भरता
भारत की एक बड़ी आबादी आज भी खेती पर निर्भर है। लेकिन खेती में काम मौसमी और सीमित होता है। भारत में बेरोजगारी (Unemployment in India) की स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि कृषि क्षेत्र में अक्सर लोगों को स्थायी काम नहीं मिल पाता और disguised unemployment यानी छिपी हुई बेरोजगारी बढ़ती है।
- तकनीकी प्रगति और ऑटोमेशन
भारत में बेरोजगारी (Unemployment in India) का एक और कारण तकनीकी बदलाव है। मशीनों और ऑटोमेशन की वजह से कम मजदूरों से ही ज्यादा उत्पादन संभव हो गया है। इसका सीधा असर पारंपरिक नौकरियों पर पड़ता है और कई लोग रोजगार से वंचित रह जाते हैं।
- असंगठित क्षेत्र की समस्या
देश की लगभग 80% से ज्यादा आबादी असंगठित क्षेत्र में काम करती है। यहां काम तो मिलता है लेकिन नौकरी की स्थिरता, उचित वेतन और सामाजिक सुरक्षा नहीं होती। इस वजह से भारत में बेरोजगारी (Unemployment in India) का असर और गंभीर हो जाता है क्योंकि काम करने के बावजूद लोग सुरक्षित रोजगार से वंचित रहते हैं।
- सीमित सरकारी और निजी नौकरियां
भारत में बेरोजगारी (Unemployment in India) इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि सरकारी नौकरियों में बहुत कम सीटें होती हैं और हर साल लाखों उम्मीदवार परीक्षा देते हैं। दूसरी ओर निजी क्षेत्र भी पर्याप्त रोजगार उपलब्ध नहीं करवा पाता। इस असंतुलन से बेरोजगारी का दायरा और फैल जाता है।
- क्षेत्रीय असमानता
भारत में बेरोजगारी (Unemployment in India) का एक और बड़ा कारण राज्यों के बीच असमान विकास है। कुछ राज्य जैसे महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक में उद्योग और रोजगार के अवसर अधिक हैं, जबकि बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अवसर कम हैं। इस असमानता से लोग रोजगार की तलाश में पलायन करने को मजबूर हो जाते हैं।
निष्कर्ष
भारत में बेरोजगारी (Unemployment in India) सिर्फ आर्थिक समस्या नहीं है, बल्कि यह समाज में असमानता और गरीबी को भी जन्म देती है। अगर सरकार और समाज मिलकर शिक्षा को रोजगार-उन्मुख बनाएँ, कौशल विकास पर जोर दें और औद्योगिकीकरण को बढ़ावा दें, तो इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
भारत में बेरोजगारी दूर करने के उपाय और सरकारी प्रयास (Solutions and Government Initiatives for Unemployment in India)
- शिक्षा और कौशल विकास
भारत में बेरोजगारी (Unemployment in India) कम करने के लिए शिक्षा और कौशल विकास सबसे महत्वपूर्ण कदम है। सरकार ने कौशल विकास मिशन (Skill India Mission) और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) जैसी योजनाएँ शुरू की हैं, ताकि युवाओं को आधुनिक और रोजगारोन्मुख कौशल सिखाया जा सके।
- उद्यमिता को बढ़ावा
भारत में बेरोजगारी (Unemployment in India) को घटाने के लिए स्टार्टअप्स और छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देना जरूरी है। सरकार ने स्टार्टअप इंडिया योजना के तहत आसान ऋण, टैक्स में छूट और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया है। इससे युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने और नए रोजगार सृजित करने में मदद मिलती है।
- कृषि क्षेत्र का आधुनिकीकरण
भारत में बेरोजगारी (Unemployment in India) कम करने के लिए कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाना आवश्यक है। सरकार की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और कृषि सिंचाई योजनाएँ किसानों को बेहतर उत्पादन और स्थायी रोजगार देने में मदद कर रही हैं।
- उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा
भारत में बेरोजगारी (Unemployment in India) घटाने के लिए उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देना जरूरी है। मेक इन इंडिया अभियान के तहत नए उद्योग स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे लाखों नई नौकरियाँ बन रही हैं।
- स्वरोजगार के अवसर
भारत में बेरोजगारी (Unemployment in India) घटाने के लिए स्वरोजगार को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुद्रा योजना (MUDRA Yojana) के माध्यम से छोटे व्यवसाय और स्वरोजगार के लिए आसान ऋण उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे लोग खुद का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।
- पर्यटन और सेवा क्षेत्र का विस्तार
भारत में बेरोजगारी (Unemployment in India) कम करने के लिए पर्यटन और सेवा क्षेत्र को विकसित किया जा रहा है। एडवेंचर टूरिज्म और हेरिटेज पर्यटन योजनाएँ नए रोजगार पैदा कर रही हैं। IT और हेल्थ सेक्टर में भी सरकार ने रोजगार सृजन के लिए नीतियाँ बनाई हैं।
- महिला कार्यबल की भागीदारी बढ़ाना
भारत में बेरोजगारी (Unemployment in India) को कम करने के लिए महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है। सरकार ने महिला उद्यमिता योजनाएँ, सुरक्षित कार्यस्थल नीति और शिक्षा अभियान शुरू किए हैं, जिससे महिलाएँ भी रोजगार के अवसरों में शामिल हो सकें।
- सरकारी और निजी क्षेत्र में निवेश
भारत में बेरोजगारी (Unemployment in India) घटाने के लिए बड़े प्रोजेक्ट्स और इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश किया जा रहा है। स्मार्ट सिटी मिशन, राष्ट्रीय हाईवे विकास परियोजना और रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के माध्यम से लाखों लोगों को रोजगार मिल रहा है।
निष्कर्ष
भारत में बेरोजगारी (Unemployment in India) केवल एक आर्थिक समस्या नहीं है, बल्कि यह सामाजिक असमानता और गरीबी से भी जुड़ी है। सरकार द्वारा उठाए गए उपाय और योजनाएँ जैसे कौशल विकास, स्टार्टअप इंडिया, मुद्रा योजना और मेक इन इंडिया, इस समस्या को काफी हद तक कम कर सकते हैं। जब युवाओं को पर्याप्त अवसर, कौशल और मार्गदर्शन मिलेगा, तभी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत और संतुलित बनेगी।
