Code on Wages 2019: New Rules and Changes (वेतन संहिता)

वेतन संहिता 2019 (Code on Wages 2019) के नए नियम, ओवरटाइम, न्यूनतम वेतन, समान पारिश्रमिक और दंड के प्रावधानों की पूरी जानकारी पढ़ें।

परिचय (Introduction)
भारत में श्रमिकों के लिए वेतन, बोनस और पारिश्रमिक से जुड़े कई अलग-अलग कानून थे। इन्हें सरल और एकसमान बनाने के लिए वेतन संहिता 2019 (Code on Wages 2019) लागू की गई। यह संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों को बेहतर सुरक्षा और पारदर्शिता प्रदान करती है।

लागू होने पर यह संहिता (Code on Wages 2019) इन चार पुराने कानूनों को खत्म कर देगी:

  • वेतन भुगतान अधिनियम, 1936 (Payment of Wages Act, 1936)
  • न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 (Minimum Wages Act, 1948)
  • बोनस भुगतान अधिनियम, 1965 (Payment of Bonus Act, 1965)
  • समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 (Equal Remuneration Act, 1976) 

वेतन संहिता 2019 से खत्म होने वाले चार पुराने कानून (Old Acts Repealed by Code on Wages 2019)

  1. वेतन भुगतान अधिनियम, 1936 (Payment of Wages Act, 1936)

उद्देश्य:
इस कानून का मुख्य उद्देश्य यह था कि कर्मचारियों को समय पर और बिना किसी अनुचित कटौती के वेतन मिले।

मुख्य प्रावधान:

  • कर्मचारियों को वेतन हर महीने एक निश्चित तिथि तक देना अनिवार्य था।
  • वेतन से केवल वही कटौतियाँ की जा सकती थीं जिन्हें कानूनन अनुमति दी गई थी (जैसे PF, ESI, टैक्स आदि)।
  • नियोक्ता कर्मचारियों को वेतन रोककर या देर से नहीं दे सकता था।
  • यह कानून मुख्य रूप से निम्न और मध्यम आय वाले कर्मचारियों पर लागू होता था।
  1. न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 (Minimum Wages Act, 1948)

उद्देश्य:
इस कानून का मकसद था कि किसी भी कर्मचारी को इतना वेतन जरूर मिले जिससे वह अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी कर सके।

मुख्य प्रावधान:

  • सरकार को अलग-अलग उद्योगों और क्षेत्रों के लिए न्यूनतम वेतन (Minimum Wages) तय करने का अधिकार था।
  • यह केवल “अनुसूचित रोजगारों” (Scheduled Employments) पर लागू होता था, यानी उन क्षेत्रों की सूची जो सरकार द्वारा अधिसूचित की गई हो।
  • नियोक्ता किसी भी कर्मचारी को तय न्यूनतम वेतन से कम नहीं दे सकता था।
  • समय-समय पर सरकार न्यूनतम वेतन की दरों में संशोधन कर सकती थी।
  1. बोनस भुगतान अधिनियम, 1965 (Payment of Bonus Act, 1965)

उद्देश्य:
इस कानून का उद्देश्य कर्मचारियों को कंपनी/संस्थान के मुनाफे में हिस्सेदारी देना था ताकि वे भी उसकी सफलता का लाभ उठा सकें।

मुख्य प्रावधान:

  • 20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों पर लागू होता था।
  • पात्र कर्मचारियों (Eligibility: ₹21,000 से कम मासिक वेतन पाने वाले) को बोनस दिया जाता था।
  • बोनस की न्यूनतम दर 8.33% और अधिकतम 20% तय की गई थी।
  • बोनस के लिए कर्मचारी की न्यूनतम सेवा अवधि भी निर्धारित थी।
  • यदि कर्मचारी गंभीर अनुशासनहीनता, चोरी, हिंसा आदि का दोषी पाया जाता था तो वह बोनस से वंचित हो सकता था।
  1. समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 (Equal Remuneration Act, 1976)

उद्देश्य:
इस कानून का उद्देश्य पुरुष और महिला कर्मचारियों के बीच भेदभाव समाप्त करना था।

मुख्य प्रावधान:

  • पुरुष और महिला को समान काम के लिए समान वेतन देना अनिवार्य था।
  • नियुक्ति, पदोन्नति या प्रशिक्षण के दौरान लिंग आधारित भेदभाव नहीं किया जा सकता था।
  • महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल की गारंटी दी गई थी।
  • उल्लंघन करने वाले नियोक्ताओं पर दंड का प्रावधान था।

क्यों बनाए गए ये कानून एक ही संहिता (Code on Wages 2019)?

इन चारों कानूनों के प्रावधान अलग-अलग थे और अनुपालन (compliance) करना जटिल हो गया था।

  • कहीं केवल वेतन की बात थी, कहीं बोनस की, कहीं न्यूनतम वेतन की और कहीं समानता की।
  • कई बार नियोक्ता और कर्मचारी दोनों ही भ्रमित हो जाते थे।

इसी वजह से सरकार ने इन्हें मिलाकर एक व्यापक और सरल कानून बनाया, जिसे हम आज वेतन संहिता 2019 (Code on Wages 2019) के नाम से जानते हैं।

मुख्य बिन्दु (Code on Wages 2019)

  1. लैंगिक भेदभाव पर रोक (Ban on Gender Discrimination)
  • पहले: समान पारिश्रमिक अधिनियम, 1976 के तहत पुरुष और महिला कर्मचारियों के बीच समान वेतन का प्रावधान था।
  • अब: संहिता ने इसे जेंडर-न्यूट्रल बना दिया है। अब सभी कर्मचारियों को, चाहे उनका लिंग कुछ भी हो, समान काम पर समान वेतन मिलेगा।
  • नियुक्ति के समय कर्मचारी के अनुभव को भी ध्यान में रखा जाएगा।
  1. कार्य दिवस की अवधि (Working Hours per Day)
  • पहले: वयस्क और किशोर श्रमिकों के लिए 9 घंटे और बाल श्रमिकों के लिए 4.5 घंटे का कार्य दिवस तय था।
  • अब: संहिता ने इसे घटाकर 8 घंटे प्रतिदिन (आराम सहित) कर दिया है।
  1. ओवरटाइम का भुगतान (Overtime Payment)
  • पहले: अलग-अलग राज्यों में ओवरटाइम की दरें अलग थीं।
  • अब: पूरे देश में ओवरटाइम का वेतन सामान्य वेतन का दोगुना (Double Wages) होगा।
  1. वेतन की एकीकृत परिभाषा (Unified Definition of Wages)
  • पहले: अलग-अलग कानूनों में वेतन, सैलरी और पारिश्रमिक की अलग-अलग परिभाषाएँ थीं।
  • अब: संहिता में एक समान परिभाषा दी गई है। इसमें शामिल होंगे:
    • बेसिक पे (Basic Pay)
    • महंगाई भत्ता (Dearness Allowance)
    • रिटेनिंग अलाउंस (Retaining Allowance)

इसमें शामिल नहीं होंगे: बोनस, एचआरए, ओवरटाइम, पीएफ योगदान, यात्रा भत्ता आदि।

  • यदि अपवर्जित मदें कुल वेतन का 50% से अधिक होंगी, तो अतिरिक्त राशि को भी वेतन माना जाएगा।
  1. न्यूनतम वेतन का दायरा (Coverage of Minimum Wages)
  • पहले: केवल अनुसूचित रोजगारों तक सीमित था।
  • अब: यह प्रबंधकीय, तकनीकी, प्रशासनिक और सुपरवाइजरी कार्य करने वाले कर्मचारियों पर भी लागू होगा।
  1. वेतन भुगतान की बाध्यता (Coverage of Payment of Wages)
  • पहले: केवल ₹24,000 मासिक वेतन तक के कर्मचारियों पर लागू था।
  • अब: यह सभी प्रकार के प्रतिष्ठानों और कर्मचारियों पर लागू होगा। कोई वेतन सीमा निर्धारित नहीं है।
  1. कर्मचारी और श्रमिक की नई परिभाषा (New Definition of Employee and Worker)
  • कर्मचारी (Employee): कोई भी व्यक्ति (अप्रेंटिस छोड़कर) जो मैनुअल, तकनीकी, प्रबंधकीय, प्रशासनिक, परिचालन या लिपिकीय कार्य करता हो।
  • श्रमिक (Worker): वे लोग जो मैनुअल, तकनीकी, परिचालन या लिपिकीय काम करते हैं।

श्रमिक में शामिल नहीं होंगे: (Code on Wages 2019)

  • अप्रेंटिस
  • प्रबंधकीय/प्रशासनिक कर्मचारी
  • ₹15,000 से अधिक वेतन पाने वाले सुपरवाइजरी कर्मचारी
  1. वेतन भुगतान की समयसीमा (Time Limit for Payment of Wages)
  • दैनिक आधार पर (Daily Basis): शिफ्ट समाप्त होते ही
  • साप्ताहिक (Weekly Basis): सप्ताह के अंतिम दिन
  • पखवाड़ा (Fortnightly): पखवाड़ा समाप्त होने के 2 दिन के भीतर
  • मासिक (Monthly): अगले महीने की 7 तारीख तक

त्यागपत्र, छंटनी या हटाए जाने की स्थिति में वेतन 2 कार्य दिवस के भीतर देना होगा।

  1. बोनस से अयोग्यता (Disqualification from Bonus)
  • पहले: धोखाधड़ी, हिंसा, चोरी आदि पर बोनस से अयोग्यता होती थी।
  • अब: यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) के दोषी पाए जाने पर भी बोनस से वंचित रहेंगे।
  1. निरीक्षक सह प्रोत्साहक (Inspector-cum-Facilitator)
  • अब निरीक्षक केवल उल्लंघन ढूँढने वाला नहीं होगा बल्कि सलाहकार (Advisor) की भूमिका भी निभाएगा।
  • पहली गलती पर सुधार का अवसर मिलेगा, लेकिन 5 साल के भीतर दोबारा गलती होने पर सीधा दंड दिया जाएगा।
  1. अपराध और दंड (Offences and Penalties)
  • अब अधिकांश अपराधों को अपराधमुक्त (Decriminalised) कर दिया गया है।
  • पहली गलती पर जुर्माना, लेकिन बार-बार गलती पर जेल की सजा भी हो सकती है।

दंड का सारांश (Summary of Penalties):

  • कम वेतन देना → ₹50,000 जुर्माना
  • बार-बार गलती → 3 माह जेल + ₹1,00,000 जुर्माना
  • अन्य प्रावधान तोड़ना → ₹20,000 जुर्माना
  • रिकॉर्ड न रखना → ₹10,000 जुर्माना

पहली बार अपराध करने वाले नियोक्ताओं को कंपाउंडिंग (Compounding) का विकल्प मिलेगा, जिसमें वे अधिकतम जुर्माने का 50% देकर मामला निपटा सकते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

वेतन संहिता 2019 (Code on Wages 2019) भारत में श्रम कानूनों को सरल, समान और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे कर्मचारियों को समय पर वेतन, समान अवसर और न्याय मिलेगा, जबकि नियोक्ताओं के लिए अनुपालन की प्रक्रिया आसान होगी।

वेतन संहिता 2019 के महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts about Code on Wages 2019)

  1. चार पुराने कानून खत्म – वेतन संहिता 2019 लागू होने पर चार कानून (वेतन भुगतान अधिनियम 1936, न्यूनतम वेतन अधिनियम 1948, बोनस भुगतान अधिनियम 1965 और समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976) समाप्त हो जाएंगे।
  2. समान कार्य पर समान वेतन – अब सभी कर्मचारियों (पुरुष, महिला और ट्रांसजेंडर) को समान काम पर समान वेतन मिलेगा।
  3. कार्य दिवस 8 घंटे – अब कार्य दिवस की अवधि घटाकर 8 घंटे (आराम सहित) तय की गई है।
  4. ओवरटाइम का統一 नियम – पूरे देश में ओवरटाइम के लिए सामान्य वेतन का दोगुना भुगतान अनिवार्य होगा।
  5. वेतन परिभाषा – अब बेसिक पे, डीए और रिटेनिंग अलाउंस ही वेतन माने जाएंगे। अन्य भत्ते (एचआरए, बोनस, यात्रा भत्ता आदि) शामिल नहीं होंगे।
  6. 50% नियम – यदि अपवर्जित मदें (Allowances) वेतन का 50% से अधिक हैं तो अतिरिक्त राशि को वेतन में जोड़कर माना जाएगा।
  7. न्यूनतम वेतन का व्यापक दायरा – अब सभी कर्मचारी, चाहे वे प्रबंधकीय, तकनीकी या सुपरवाइजरी कार्य करते हों, न्यूनतम वेतन के दायरे में आएंगे।
  8. वेतन भुगतान की बाध्यता – अब यह सभी कर्मचारियों पर लागू है। कोई सीमा (₹24,000 जैसी) नहीं होगी।
  9. समय पर वेतन
    • दैनिक वेतन: शिफ्ट समाप्त होते ही
    • साप्ताहिक वेतन: सप्ताह के अंतिम दिन
    • पखवाड़ा वेतन: 2 दिन के भीतर
    • मासिक वेतन: अगले महीने की 7 तारीख तक
  10. त्यागपत्र/छंटनी की स्थिति में – 2 कार्य दिवस के भीतर पूरा वेतन देना होगा।
  11. बोनस नियम – धोखाधड़ी, हिंसा और चोरी करने वालों के साथ-साथ अब यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) करने वालों को भी बोनस नहीं मिलेगा।
  12. निरीक्षक सह प्रोत्साहक – अब निरीक्षक केवल उल्लंघन ढूँढने वाला नहीं होगा, बल्कि सलाहकार और मार्गदर्शक की भूमिका भी निभाएगा।
  13. दंड और अपराध
  • कम वेतन देने पर ₹50,000 जुर्माना
  • बार-बार गलती पर 3 माह जेल और ₹1,00,000 जुर्माना
  • अन्य प्रावधान तोड़ने पर ₹20,000 जुर्माना
  • रिकॉर्ड न रखने पर ₹10,000 जुर्माना
  1. कंपाउंडिंग (Compounding) – पहली गलती पर नियोक्ता जुर्माने का 50% देकर मामला निपटा सकते हैं।
  2. उद्देश्य – श्रम कानूनों को सरल, एकसमान और पारदर्शी बनाना, ताकि कर्मचारी और नियोक्ता दोनों के लिए अनुपालन आसान हो सके।
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    http://chrome-extension://efaidnbmnnnibpcajpcglclefindmkaj/https://labour.gov.in/sites/default/files/the_code_on_wages_as_introduced.pdf

https://apfcexamguide.in/epf-act-1952/

MCQs on Code on Wages, 2019

1. Code on Wages, 2019 लागू होने पर कितने पुराने श्रम कानून समाप्त हो जाएंगे?

a) 2
b) 3
c) 4
d) 5
Answer: c) 4


2. Code on Wages, 2019 में कार्य दिवस की अधिकतम अवधि कितनी तय की गई है?
a) 6 घंटे
b) 7 घंटे
c) 8 घंटे
d) 9 घंटे
Answer: c) 8 घंटे


3. समान कार्य पर समान वेतन का प्रावधान किन पर लागू होगा?
a) केवल पुरुषों पर
b) केवल महिलाओं पर
c) केवल स्थायी कर्मचारियों पर
d) पुरुष, महिला और ट्रांसजेंडर सभी पर
Answer: d) पुरुष, महिला और ट्रांसजेंडर सभी पर


4. ओवरटाइम के लिए कर्मचारियों को कितना भुगतान मिलेगा?
a) सामान्य वेतन के बराबर
b) सामान्य वेतन का 1.5 गुना
c) सामान्य वेतन का 2 गुना
d) सामान्य वेतन का 3 गुना
Answer: c) सामान्य वेतन का 2 गुना


5. Code on Wages, 2019 में ‘वेतन’ की統一 परिभाषा में क्या शामिल है?
a) बेसिक पे, डीए, रिटेनिंग अलाउंस
b) एचआरए, यात्रा भत्ता
c) मेडिकल भत्ता, बोनस
d) सभी प्रकार के भत्ते
Answer: a) बेसिक पे, डीए, रिटेनिंग अलाउंस


6. यदि भत्ते (Allowances) वेतन का 50% से अधिक हैं, तो क्या होगा?
a) कोई बदलाव नहीं होगा
b) अतिरिक्त राशि वेतन में जोड़ी जाएगी
c) कर्मचारी को कम वेतन मिलेगा
d) बोनस रद्द हो जाएगा
Answer: b) अतिरिक्त राशि वेतन में जोड़ी जाएगी


7. न्यूनतम वेतन का दायरा किन पर लागू होगा?
a) केवल औद्योगिक मजदूरों पर
b) केवल ठेका कर्मचारियों पर
c) सभी कर्मचारियों पर (प्रबंधकीय, तकनीकी, सुपरवाइजरी सहित)
d) केवल असंगठित क्षेत्र पर
Answer: c) सभी कर्मचारियों पर (प्रबंधकीय, तकनीकी, सुपरवाइजरी सहित)


8. मासिक वेतन का भुगतान अधिकतम कब तक करना अनिवार्य है?
a) महीने के अंतिम दिन
b) अगले महीने की 5 तारीख तक
c) अगले महीने की 7 तारीख तक
d) अगले महीने की 10 तारीख तक
Answer: c) अगले महीने की 7 तारीख तक


9. बोनस से वंचित किन्हें किया जाएगा?
a) अनुपस्थित रहने वालों को
b) काम में लापरवाही करने वालों को
c) धोखाधड़ी, हिंसा, चोरी और यौन उत्पीड़न करने वालों को
d) अधिक छुट्टी लेने वालों को
Answer: c) धोखाधड़ी, हिंसा, चोरी और यौन उत्पीड़न करने वालों को


10. Code on Wages, 2019 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
a) केवल कर्मचारियों को लाभ देना
b) केवल नियोक्ताओं की सुविधा
c) श्रम कानूनों को सरल, एकसमान और पारदर्शी बनाना
d) केवल सरकार के लिए राजस्व बढ़ाना
Answer: c) श्रम कानूनों को सरल, एकसमान और पारदर्शी बनाना

code on wages 2019
code on wages 2019